मुक्तक


ठुस्स ठुस्स गन्हाउने जाड़ नखाउ है भंदिया छु नि 
जाड़ खाए साँझ घर नाआऊ है भंदिया छु नि
भट्टी वाली त्यो मोरीले तिम्लाई आखा लाउछे अरे
मलाई छाडी भट्टी तिर नजाउ है भंदिया छु है