मुक्तक


चल्दैछ बिहानी बिस्तारै बिस्तारै 
छल्दैछ सिरानी बिस्तारै बिस्तारै
होसमा जोस राख्नुहोस सबैले
ढल्दैछ जवानी बिस्तारै बिस्तारै